Saturday, 4 December, 2010

alvida allahabad

allahabad se mujhe pyar hai. bina shart. 1994 ke shuru ma jab bade sapne le kar aya tha tab bhi aur ab jab apne sare sapne apni hi potli me samet kar allahabad chod raha hu tab bhi. jab dobara allahabad aya tha to yaha bachpan ke yadee kheenchti thee, ab ja raha hu to utsah, umang aur khas taur par allahabad ka sikhaya hua yad aa raha hai.

alvida llahabad

Monday, 13 September, 2010

वो समझ बैठे कि हम भी फरेब करते है.

उन सभी लोगो को धन्यवाद जो मेरे साथ मेरी ताकत बन कर खड़े है न कि मेरे लिए श्यापा कर रहे हैं. इसी हफ्ते ऑफिस जाते समय कुछ पंक्तिया होठो पर आयीं, आप सबके लिए मेरी ओर से .....
नज़र को फेर कर वो दिल पे वार करते हैं
और एक हम है कि उनको सलाम करते हैं.
उनके पहलु में मेरे जख्म सारे सूख गए
वो समझ बैठे कि हम भी फरेब करते है.
काट के पंख मेरे, देखो वो कैसा झूम उठा
ये अलग बात है कि हम हौसलों से उड़ते है.
उनके होने कि खबर मुझको ऐसे होती है
चाँद तारे भी जब इशारो से बात करते है.
नींद भी आँखों से कुछ रूठी हुई सी लगती है
दिन बुरे दोस्त, क्या इसी को कहते है.
प्यार में हमने निभाईं हैं, इस तरह रस्में
चरागे दिल कि रोशनी में, उनको पढ़ते हैं
.

Saturday, 11 September, 2010

कहा सुना माफ़

२००९ में मुम्बई में जिस फूलों वाली लड़की ने मुझे कर्ज में डाला था उसने मुझे ब्लॉग पर भी कर्ज से मुक्त नहीं होने दिया. पूरे ८ महीने बीत गए और मै लाख चाह कर भी फूलों वाली लड़की की दास्ताँ नहीं कह सका. इस दैरान समंदर में जाने कितना पानी बह गया इसलिए जी करता है कि उसका कर्जदार बना रहूं. क्या पता अपनी इस गलती से जीवन का कोई और नया सबक हासिल कर सकूं. अख़बार में पूरे १५ साल रिपोर्टिंग करने के बाद अपनी मर्जी से अब डेस्क का काम करने का निर्णय लिया है. ये सोच कर कि जिस भूपेश को कही पीछे छोड़ आया था, शायद उससे कही मुलाकात हो जाये. इसलिए कहा सुना माफ़ करियेगा. उम्मीदों का नया सफ़र शुरू कर रहा हूँ. इस उम्मीद पे कि कम से कम अपनों कि उम्मीद पे खरा उतर सकू.

Followers

हिन्दी में लिखिए

dil ki bat

गुलाबी दिल आपके ब्लॉग पर

About Me

My photo
खुद को समझने की कोशिश लंबे समय से कर रहा हूं। जितना जानता हूं उतने की बात करूं तो स्कूल जाने के दौरान ही शब्दों को लय देने का फितूर साथ हो चला। बाद में किसी दौर में पत्रकारिता का जुनून सवार हुआ तो परिवार की भौंहे तन गईं फिर भी १५ साल से अपने इस पसंदीदा प्रोफेशन में बना (और बचा हुआ) हूं, यही बहुत है। अच्छे और ईमानदार लोग पसंद हैं। वैसा ही रहने की कोशिश भी करता हूं। ऐसा बना रहे, यही कामना है।
There was an error in this gadget