Sunday 26 July 2009

फांट के लिए धन्यवाद.

जब से ब्लॉग बनाया है। फांट की समस्या से जूझ रहा हूं। अभी -अभी सतीश सर ने यह जादू की पुड़िया दी है। अगर जादू चला तो मेरा काम बहुत आसान हो जाएगा। किसी और को जादू की यह झप्पी चाहिए तो सतीश जी के जादू के बक्से (अरे भाई मोबाइल) पर घंटी बजा सकता है।

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खुद को समझने की कोशिश लंबे समय से कर रहा हूं। जितना जानता हूं उतने की बात करूं तो स्कूल जाने के दौरान ही शब्दों को लय देने का फितूर साथ हो चला। बाद में किसी दौर में पत्रकारिता का जुनून सवार हुआ तो परिवार की भौंहे तन गईं फिर भी १५ साल से अपने इस पसंदीदा प्रोफेशन में बना (और बचा हुआ) हूं, यही बहुत है। अच्छे और ईमानदार लोग पसंद हैं। वैसा ही रहने की कोशिश भी करता हूं। ऐसा बना रहे, यही कामना है।
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