Thursday, 6 August, 2009

नए नजरिए से पाकिस्तान

बुधवार को जल्दी घर पहुंचने के वायदे के बाद भी काफी देर हो गई। घर पहुंचते-पहुंचते घड़ी की सूइयां १२ का साथ छोड़ चुकी थीं सो बीवी से सिफॆ गुडनाइट ही हो सकी। मतलब यह कि देर से आने के कारण पड़ने वाली डांट से बच गया।खाने के बाद रोज की शगल में रिमोट के बटन के साथ छेड़छाड़ के बीच एक कायॆक्रम पर आंखे रुक गईं। नैटजियो की फेमस सिरीज डोंट टेल माई मदर में इस बार पाकिस्तान की बारी थी। पाकिस्तान के बारे में जब भी, जितना भी पढ़ो मन नहीं भरता। हमेशा और जानने की इच्छा होती है, (पट्टिदार जो ठहरा) , सो आंखें टीवी से चिपक गई। एक घंटा जाने कब बीत गया पता ही नहीं चला। इस दौरान पाकिस्तान को बिल्कुल नए नजरिए से देखने को मिला। ऐसे फैक्ट जो सालों से सूचनाओं के बाजार में रहने के बाद भी मेरी जानकारी में नहीं थे।
तथ्य एक-
करांची में हैदर भाई की वकॆशॉप हैं। यूं तो यह एक लेदर फैक्ट्री है, जहां हर रोज करीब सवा सौ महिलाएं (इनमें १२ सौ १४ वषॆ की लड़िकयां भी शामिल हैं) में चमड़े के सामान बनती हैं। कुछ नकाब, स्कटॆ नुमा ड्रेस, कोड़े या ऐसी ही कुछ और चीजें। दरअसल यह वकॆशॉप अमेरिका, मलयेशिया, थाईलैंड, चीन जैसे देशों के अधिकृत या अनाधिकृत सेक्स स्टोसॆ के लिए सेक्स ट्वॉय बनाती हैं। धमॆ को लेकर बेहद कट्टर छवि वाले पाकिस्तान जैसे देश में ऐसे कारोबार की कल्पना भी अजीब लगती हैं। हैदर बताते हैं कि वर्कशॉप में काम करने वाली किसी भी महिला को यह नहीं पता कि वह जो चीजें बना रहीं हैं, उसका इस्तेमाल क्या है। यह काम उनके लिए सिफॆ काम है। उनका मानना है कि कोई भी धमॆ कोई काम करने से नहीं रोक सकता।
तथ्य दो-
पिछले दिनों भारत के एक लोकप्रिय टीवी चैनल ने बेगम कायॆक्रम प्रस्तुत किया। इसमें जॉन इब्राहिम से लेकर अभिषेक बच्चन तक साक्षात्कार को पहुंचे। काफी हॉट और ब्यूटीफुल मानी गई इस कायॆक्रम की होस्ट बेगम को लेकर अस्सी फीसदी लोग अब भी अनजान हैं। कुछ उन्हें एक सेक्सी ओल्ड एज महिला के तौर पर जानते हैं तो कुछ औरत के वेष में पुरुष। लेकिन इस कायॆक्रम को होस्ट करने वाली बेगम दरअसल पाकिस्तान के सेलिब्रेटी अली हैं। न नर न नारी अली बेगम के नाम से ही टीवी कायॆक्रम होस्ट करते हैं। यह कायॆक्रम पाकिस्तान का सबसे लोकप्रिय राजनीतिक साक्षात्कार कायॆक्रम हैं। इस कायॆक्रम को प्रति सप्ताह करीब तीन करोड़ लोग देखते हैं। अली कहते हैं कि पॉकिस्तान में आतंकवाद, आए दिन होने वाले कत्लेआम, जेहाद इतने बड़े मुद्दे हैं कि एक पुरुष (?) के टीवी पर साड़ी पहन कर राजनीतिक हस्तियों का साक्षात्कार लेना, किसी भी तरह से धार्मिक विरोध की वजह नहीं बन पाया। वह अपने कायॆक्रम और अपने चाहने वालों के बीच खुश हैं। उनकी नजर में पाकिस्तान सिफॆ वैसा नहीं है जैसा मीडिया उसे दिखाता है।
अंतिम और बेहद दिलचस्प तथ्य-
करांची में एक मोहतरमा पाकिस्तान के सबसे हाईटेक ब्यूटी पालॆर की संचालिका हैं। मोटे पैसे वाली महिलाएं इस सैलून में आना अपनी शान समझती हैं लेकिन हो सकता हैं कि इस सैलून में पहली बार पहुंचने वाली कोई महिला डर से चीख पड़े या फिर गश खा कर गिर जाए। दरअसल इस पालॆर की सभी महिलाएं वें हैं जिन्हें उनके शौहर, मंगेतर या प्रेमी ने किसी न किसी कारण से उन्हें तेजाब, एसिड या फिर आग से जला दिया है। यह पॉलॆर अब तक पाकिस्तान की २३४ ऐसी महिलाओं के इलाज पर करोड़ों रुपये खचॆ कर चुका हैं और उन्हें ब्यूटिशयन के तौर पर स्थापित कर चुका है। दूसरे के सौंदयॆ को चार चांद लगाती इस पॉलॆर की ब्यूटिशियन आतिया की एक आंख तेजाब से गल चुकी है। उनके चेहरे का अधिकांश हिस्सी किसी पिघले हुए प्लास्टिक सा उनके गले तक लटका हुआ हैं लेकिन वह खुद को किसी से कम नहीं मानतीं, क्योंकि उनके पास दूसरों को खूबसूरत बनाने का हुनर है।ये तीनों ही बातें हो सकता है आपके के लिए सूचना भर हों लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि कराची में पालॆर चलाने वाली मोहतरमा को भारत में भी अपने पालॆर की फ्रेंचाइजी देनी चाहिए। उन तक तो पूरे पाकिस्तान से सिफॆ २३४ महिलाएं पहुंचीं, यहां तो शायद हर सूबे से इसकी दो-चार गुना महिलाएं अपनों की सताई हुई मिल जाएं। अच्छी सीख तो दुश्मन से भी ली जा सकती हैं, क्या आप मुझसे सहमत हैं ?

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खुद को समझने की कोशिश लंबे समय से कर रहा हूं। जितना जानता हूं उतने की बात करूं तो स्कूल जाने के दौरान ही शब्दों को लय देने का फितूर साथ हो चला। बाद में किसी दौर में पत्रकारिता का जुनून सवार हुआ तो परिवार की भौंहे तन गईं फिर भी १५ साल से अपने इस पसंदीदा प्रोफेशन में बना (और बचा हुआ) हूं, यही बहुत है। अच्छे और ईमानदार लोग पसंद हैं। वैसा ही रहने की कोशिश भी करता हूं। ऐसा बना रहे, यही कामना है।
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